जीवंत सच्चाइया जिन्हें देख कर भी हम अनदेखा कर देते है उन्हीं सच्चाइयो के झरोखे में झाँकने को मजबूर मेरा मन और उस मन कि व्यथा अपने ही जैसों को समर्पित करना ही मेरा उद्देश्य है, और मेरा निवेदन है कि मेरी सोच में जो अधुरापन रह भी गया है उस पर आप लोगो की कीमती टिप्पणी यदि समय समय पर मिलती रहे तो शायद कोई सार्थक तत्व समाज कि जागरूकता में योगदान दे सके!
Tuesday, August 9, 2011
"देश 65वे स्वतंत्र दिवस पर हार्दिक सवेदना"
Friday, August 5, 2011
मुश्किलें
मुश्किलें जब तलक ना हो जिंदगी में। जिंदगी खाली-खाली सी लगती है।
यह समझौता कर लेना ही बेहतर है क्योकि जिंदगी में खुशिया तो गाली लगती है!
छीन गया अमन चैन, अब तो केवल और केवल मुश्किलो कि बहाली लगती है!
आम आदमी कि गमजदा जिंदगी, केवल सियासतकारो कि ही दिवाली लगती है!
मुफ्फलसी का आलम मत पूछो मेरे दोस्त, दौड़ कितना भी ले हाथ कंगालि लगती है!
अपने ही घर में हाल होगा ऐसा सोच के कल कि तस्वीर में बदहाली दिखती है!
आँखों में नींद नही, नींद आई भी तो सुखद सपनों से खाली दिखती है!
मुश्किलें जब तलक ना हो जिंदगी में। जिंदगी खाली-खाली सी लगती है।
यह समझौता कर लेना ही बेहतर है क्योकि जिंदगी में खुशिया तो गाली लगती है!
हर रोज़ आतंक का साया, अब अगली मौत में अपनी ही बारी लगती है!
क्या जबाब दू इस जिंदगी को, हर सुभो शाम झगझोरती साँवली लगती है!
रोज़ सुनता हूँ ख़बर जो आम हुई जिंदगी में इसलिए हर ख़बर अब पुरानी लगती है!
हम आम आदमी है हमे मरना है हर रोज़, जिंदगी कि बात तो अब जाली लगती है!
मुश्किलें जब तलक ना हो जिंदगी में। जिंदगी खाली-खाली सी लगती है।
यह समझौता कर लेना ही बेहतर है क्योकि जिंदगी में खुशिया तो गाली लगती है!
Thursday, August 4, 2011
अपील
संसद की दुहाई देने वाले नेताओं से अपने ब्लॉग के माध्यम से पूछना चाहता हूँ कि मान्यवरो आपकी संसदीय बहस से आम जनता का क्या लेना देना जब आप महंगाइ पर कोई रोक ही नही लगा सकते! वर्ष में चौथी बार दूध का दाम बड़ जाना, पेट्रोलियम आम आदमी कि पहुँच से बाहर हो जाना, साँग सब्ब्जियो में सौ प्रतिशत का हिजाफा हो जाना, एक अदद घर का सपना मात्रा सपना बन कर रह जाना, अपने बच्चों कि शिक्षा के लिए अपने निवाले से समझौता करना पड़ता है शौक आउर इच्छाओं को पूरा करना तो बहुत दूर की बात है, बेरोजगारी की समस्या से जुझ कर आज लोग खुद्खुशी करने पर आमादा हो ग्ये है ऐसे में आप कि संसदीय बहस का आम आदमी क्या अचार डालेगा! ग्लोबल परिस्थियो का हवाला दे कर जनता का फुद्दु काटने वाले आपके बयान से आम जनता का दम घुटता है, कब तक इसी तरह कि फिजूल बकवासबाज़ी से अपना पल्ला झाड़ते रहेंगे, यह आप सभी जानते है कि आज जनता भलीभाँति जानती है कि इस बेलगाम हालत के सिर्फ़ आप ही जिम्मेदार है क्योकि आप अपने घर को भरने के चक्कर में वर्षो से चोरबजारी करते रहे है जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है, समय समय पर आप लोगो कि करतूतें जग जाहिर होती रही है, आपके कितने ही साथियों पर भ्रष्टाचार के मुकदमे भी चल रहे है, हालाँकि आप जैसे शातिर लोग इन मुकदमों से भी बरी हो जाते है या फिर कुछ समय बाद फिर बेशर्मो कि तरह दुसरे भ्रष्टाचार में लग जाते है, खैर इन बातों में क्या रखा है क्योकि आप जैसे दबंग लोगो का आम जनता कुछ बिगाड़ भी नहीं सकती है इस लिए एक आम आदमी कि अपील समझ कर विचार करे की भ्रष्टाचार कि भी एक सीमा होनी चाहिए, आम आदमी आज कंगाली के हाल से बेहाल हो कर अपना दम ना तोड़ दे, दूसरों का निवाला छीन कर कब तक आप चैन से जी पाएँगे, कृपया यह राछसी परवत्ति छोड़ दे, आप लोग राजनीति में सेवा भाव तो ला नहीं सकते पर अगर थोड़ी भी इंसानियत है तो रहम करे! "नीरज कि पाती"
महंगाई पर घिरे मनमोहन
सत्र शुरू होने से पहले ही प्रधानमंत्री को लेकर कड़ा तेवर बना चुके विपक्ष ने मौका मिलते ही अपनी भड़ास निकाल दी। चर्चा की शुरुआत यशवंत ने की। अलग-अलग सर्वे का आंकड़ा देते हुए उन्होंने कहा कि आम लोगों के लिए स्थिति बद से बदहाल हो गई है। ऐसे में आर्थिक विकास का हवाला देना गरीबों का उपहास उड़ाने जैसा है। इसी क्रम में उन्होंने कहा, 'जिन्हें चुनाव लड़ना होता है, वे जानते हैं कि वोटरों के बीच जाकर लगातार बढ़ रही डीजल, पेट्रोल और केरोसीन की कीमत से जूझना कितना मुश्किल होता है।' उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार महंगाई से लड़ना चाहती है तो व्यावहारिक कदम उठाने होंगे। गोदाम में पड़े अनाज बाजार में उतारे जाएंगे, तभी कीमतों पर लगाम लगाई जा सकती है। शरद यादव की बारी आई तो उन्होंने कॉरपोरेट जगत को दी गई छूटों का हवाला देते हुए कहा कि गरीबों को चूसकर मुनाफाखोरों की आमदनी बढ़ाई जा रही है।
केंद्रीय कानून मंत्री खुर्शीद ने कहा, 'जादुई छड़ी न आपके पास और न ही हमारे पास। लेकिन..हमारे पास मां है। हमारे पास मनमोहन सिंह हैं।' खुर्शीद ने आगे कहा कि राजकोषीय घाटा न बढ़ने दिया जाता तो बेरोजगारी बढ़ती। उन्होंने विपक्ष को चेताया कि केवल छींटे न उछालें, बल्कि मिलकर काम करें। ऐसा न हो कि जो निर्णय हमें करना हो वह कोई और करने लगे। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं होगा।
चर्चा में राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह, सपा के शैलेंद्र सिंह, बसपा के दारा सिंह चौहान समेत कुछ दूसरे नेताओं ने भी हिस्सा लिया। सभी ने सरकार को चेताया कि अब भी महंगाई से निपटने में देरी हुई तो जनता नहीं बख्शेगी। आज [गुरुवार को] वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी चर्चा का जवाब देंगे!
महंगाई पर होने वाली चर्चा और प्रधानमंत्री कठघरे में!
जताया रोष की जनता परेशान और पहुँच गयी सदमे में!
विपक्ष ने निकाली भड़ास, संसद करी भंग विपक्ष के खेमे ने!
राजनीतिज्ञ ठगे जनता को, हम ठगे जाए हर महकमे में!
महंगाई पर होने वाली चर्चा और प्रधानमंत्री कठघरे में!
हर रोज़ एक नई लूट का पैतरा, हम लुटे घूमते इस जमाने में!
पक्ष विपक्ष सब चोर भये, संसदीय सत्र चले मात्र दिखावे में!
यह खोखली बातें है कोई तैयार नहीं व्यावहारिक कदम उठाने में!
राजकोष का देकर हवाला, कहती सरकार वह लगी देश बचाने में!
निर्णय के नाम पर बातें कोरी,सरकार लगी मुद्दे निबटाने में!
विपक्ष भी सियासत करती और लगी सियासी मुद्दा भुनाने में!
हर ओर महंगाइ कि आग, कोई साथ नही आग बुझाने में!
महंगाई पर होने वाली चर्चा और प्रधानमंत्री कठघरे में! "नीरज की पति"
Wednesday, August 3, 2011
क्रांति एक दिन में नही आती
यह जज्बा दिलों में जगाने कोई तो आया,
जनुने हाल चलो किसी ने तो जताया!
मानता हूँ क्रांति एक दिन में नही आती,
पर एक चिंगारी दिलों में आग है लगाती!
वक्त है फिर विद्रोह का बिगुल बजाने की,
सड़कों में प्रदर्शन कि रैलिया सजाने की!
खोखली राजनीति में चोरों का बोलबाला है,
इनके ही कारण अपने घरों में दीवाला है!
जरूरत है आज इन्हे जड़ से मिटाने की,
वक्त है फिर विद्रोह का बिगुल बजाने की!
सोचो मत आगे आओ,अण्णा जैसों का हाथ बटाओ!
ना पड़े अकले राम देव,भाइ कंधे से कंधा मिलाओ! फर्ज़ तुम्हारा भी वतन पर, कोहराम करो, कोहराम करो!
छुपी चिंगारी दिल में तेरे, उसे आज सरेआम करो!
जीवन रह जाये ना खाली, उसमें एक मुकाम भरो!
नर हो ना विनाश करो जीवन का, कुछ तो अच्छे काम करो!
इनसान योनि में जन्मे हो तो इसका भी कल्याण करो!
किसी कि शुरुवात से,चलो एक उदेश्य तो पाया!
मौका हाथ से जाने ना दो,फिर आया के ना आया!
यह जज्बा दिलों में जगाने कोई तो आया,
जनुने हाल चलो किसी ने तो जताया!
असली नकली
जो दिखता है वोह होता नही, जो होता है वो दिखता नही,
यह नाम को नेता कहलाते है पर असली में व्यापारी है,
खून में इनके जहर है बहता, इंसान नही अत्यचारि है,
दुःख दर्द के असली कारण यही,
क्या मिलिये ऐसे लोगों से जिनकी फितरत छुपी रहे!
नकली चेहरा सामने आए असली सूरत छुपी रहे------
दीन धर्म बेच के घूमे, इन पर किसी का जोर कहा!
अंधी दौड़ में दौड़ रहे देश कि परवाह किसे कहा!
देश की सेवा भाड़ में जाये, यह तो भरेंगे घर यहा!
नेता का नकाब है पहन कर, करते खुल कर यह मक्कारी!
राम बचाये इन लोगो से यह छुट्टे साड़ सरकारी!
क्या मिलिये ऐसे लोगों से जिनकी फितरत छुपी रहे!
नकली चेहरा सामने आए असली सूरत छुपी रहे!
"नीरज की पाति"
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