Wednesday, April 11, 2012

नववर्ष

पूरब पश्चिम उत्तर दछिण 
खिल उठी चारो दिशाये 
प्रत्येक दिशा शुभ संदेश
नववर्ष की शुभ कामनाये
गाव खेत चौपाल हाट
झूमे सब बालक बालाये
स्वर तरंगित ओर छोर
नववर्ष की शुभ कामनाये
धरा गगन नदी नहर पे
अरुण अरुणिमा रहा बिखराये
रवि किरणों ने लिखी पंक्ति
नववर्ष की शुभ कामनाये
ओस की नन्हीं बूँदों से
हरित वन उपवन सभी नहाये
मधुमस्त मयूर नाचे गाये
नववर्ष की शुभ कामनाये

ऐ बहारो की रौनक

ऐ बहारो की रौनक फिजाओ की मल्लिका
तेरी नजरों का जादू बिखरा जहाँ में
यह कातिल अदाये और मदहोश मै हूँ
मेरी नींद चुरा के तू मशगूल कहा है
गुलाबो से गुलाबी हाय यह रंग रूप तेरा 
फिजाओ की मस्ती तुझसे ही जवां है
मेरे दिल को चुरा के न इठलाओ जानम
मेरे दर्दे दिल पे तेरा नाम बयाँ है
ऐ बहारो कि रानी तूझसे चैन मेरे दिल का
हँस के यु बिजली गिराती यहा है
ऐ बहारो की रौनक फिजाओ की मल्लिका
तेरी नजरों का जादू बिखरा जहाँ में

शबनम में भीगी

शबनम में भीगी ऐ जाने तमन्ना
अपने दिल की बता दे दिल में क्या है
तेरी ज़ुल्फों से होकर गिरती जो बूँदें
उनमे अंगूर-ए शराब से ज्यादा नशा है
तेरे गीले बदन से चिपकी जो चोली
हुस्न और शबाब की अजब इंतिहा है 
उस पर यह उफ्फ नजरों का जादू
ख़बर ही नहीं की अब यह दिल कहा है
नहीं दिल पे काबू हुस्ने-ए हसीना
जाने जाँ तू ही बता दे तेरी मर्जी क्या है
शबनम में भीगी ऐ जाने तमन्ना
यह दिल तेरा पागल क्या तुझको पता है

वीर तेरी शहादत

वीर तेरी शहादत गयी बेकार
कोई नहीं सुनता तेरे घर से उठती चित्कार
असहाय हो गयी हर पुकार
सत्ता-विपक्ष की खीचतान में तथ्य हुए लाचार
कानूनी कार्यवाही लम्बा विचार
मुजरिम को मुजरिम कहने को भला कौन तैयार 
न्याय के नाम लंबा इंतज़ार
नेताओं के घड़ीयाली आँसू मुद्दे पर पार्टी प्रसार
खोखली बातें असलियत में दीवार
कोई नहीं सुनने वाला सियासत में फँसा तेरा परिवार
तेरी भटकती आत्मा भी ले स्वीकार
वीर यही सच है की तेरी शहादत गयी बेकार
कोई नहीं सुनता तेरे घर से उठती चित्कार
वीर तेरी शहादत गयी बेकार

बहुमिंजिला इमारत अंतहीन

ईट पत्थरों से पटी जमीन
बहुमिंजिला इमारत अंतहीन 
हरियाली जाने कहा विलीन
विकास के नाम तल्लीन
खोये खेत खलियान रंगीन
शोर शराबे में हुए लींन 
परम्पराये हुई बोनी
इंसानियत हुई घिनौनी
धर्म ईमान का कीमत तय
जुर्म से अब किसको भय
बदली गयी जीवन की लय
भ्रष्टाचार में हुयीं श्रिष्टा विलय
पता नही यह कैसा नवनिर्माण
जहा भेद गए विकृति के बाण
आज नहीं ख़ुद पर यकीन
रुलाती किलसाती खबरें ताजो तरीन
गैरियत अकेलापन जीवन उदासीन
ईट पत्थरों से पटी जमीन
बहुमिंजिला इमारत अंतहीन

प्यार कि डगर

प्यार कि यह डगर है अधूरी डगर 
तेरे बिन जिंदगी मुश्किलों का स़फर
यु न जाना सनम फेर कर ये नजर
जी न पायेंगे हम ऐ मेरे हमसफर 
रात दिन बस तुझे हा तुझे ही सनम
चाहता साथ तेरा मै तो हर एक जनम
डोर बंध ही गयी रब की ऐसी मेहर
तेरे दम से ही रौनक हर शामें-शहर
प्यार कि यह डगर है अधूरी डगर
तेरे बिन जिंदगी मुश्किलों का स़फर

खूबसूरती

तुम्हारी खूबसूरती पर,
सोचता हूँ बेहिसाब लिखूँ
कुछ कमी ना रह जाए,
तो चलो एक किताब लिखूँ 
तुम फूलों से कोमल,
क्यू न तुम्हे मै गुलाब लिखूँ 
चाँद भी तुमसे शरमाये,
तो तुम्हे आफताब लिखूँ
हर एक कि तमन्ना तुम,
तुम्हे हर आँख का ख्वाब लिखूँ
तुमसे बेहतर न कोई दुनिया में,
तुम्हे लाजबाब लिखु
फिजाओ में रौनक तुझसे,
तो मै तुझे उंदा शबाब लिखूँ
नशा तेरी आँखों में ऐ कातिल,
मै तुझे शराब लिखु
मन पूछता कभी तो देखोगी,
बता हसीं क्या जबाब लिखूँ