Wednesday, April 11, 2012

दौलत की दौड़

दौलत की दौड़ में लगे रहे 
शोहरत की होड़ में पड़े रहे
उम्र अपनी रफ्तार में थी
चाहतें हब्या में गिरफ्तार थी 
जब वक्त था तब रिश्तों से हुए बेपरवाह 
जब जरूरत पड़ी तो रिश्ते हुए लापरवाह 
जरूरतों के नाम ईमान का व्यापार
जबकि कुल मिला के थी जरूरते चार
काश मौका आता और लेता सुधार
पर वक्त कब करता किसी का इंतजार
न किसी का दर्द देखा
न उफनता बरबाद समंदर देखा
पत्थर आंखो पर जड़ें रहे
मदद कर सकते थे पर खड़े रहे
दौलत की दौड़ में लगे रहे
शोहरत की होड़ में पड़े रहे
वही टीस अब अपनी हुई
कल कि मौज पराइ हुई
जब चिड़िया चुग गयी खेत
तब जिंदगी ही बौराई हुई

टिक टिक घड़ी

टिक टिक घड़ी चलती रही 
बात बनती फिर बिगड़ती रही 
समय के आलेख पर उभरती तसवीर
कल तक तो थी पर आज हुई छीर्ण 
ओस कि बूँदों में छार कि अनूभूतियाँ 
अश्रु विलय हुई आस् कि प्रतिलीपिया 
धरा की गोद में आग की चिंगारिया
छा गयी गगन में काल क्रोध बदरियाँ
सिन्धु प्रवाह सब बहाने को तैयार है
पवन की रफ्तार में अंधड़ प्रहार है
प्रकृति ने मानस का मनोरूप धर लिया
अती इंसान कि जो विकृत रूप कर लिया
मूल्यों को त्याग जीवन धन बदल दिया
निर्माण के नाम प्रकृति घात कर दिया
परंपराओं ने अनगिनत दीप थे जलाये
विकास की आड़ में हम धरोहर मिटाये
बारूद की सुरंग रात की कालिमा
खो गयी कहीं नवप्रभात की लालिमा
तन को जलाये उषा कि ऊष्मा
विलुप्त हुआ चाँदनी बिखेरता चन्द्रमा
कदमो कि की खोज पर धरती नहीं
जिंदगी यु ही बदलती रही
टिक टिक घड़ी चलती रही
बात बनती फिर बिगड़ती रही

आम आदमी कि पहचान

बिना सोचे चल दिया
जो मिला उसी से मिल लिया
तक़दीर से शिकायत नहीं
आम आदमी कि पहचान यही
जरूरतें ईमान डिगाती नहीं
दर्द रूह कपाती नहीं
हर हाल को जिया जोश से
हौसला रहा होश से
इसलिये आज भी जिन्दा हूँ
यथार्थ का वाशिन्दा हूँ
बस रहम खुदा का रहे
हैवानियत ख़ुद से जुदा रहे
किसी ने कब क्या किया
उसे किस्मत समझ लिया
आज को जी भर जिया
कल का न पता किया
खुदी को सलाम किया
वक्त का एहतराम किया
तक़दीर से न शिकवा किया
कोशिसो से अंजाम दिया
बिना सोचे चल दिया
जो मिला उसी से मिल लिया

ढल ना जाए शाम

दिल सुनने को प्रेरित है
ढल ना जाए शाम
प्रिय कुछ ऐसा कह दो
मन दुविधा में फँसा हुआ
बिगड़ी बातें बन जाएँ 
कुछ ऐसा कह दो
दर्द बहुत जमाने में
राहत दे जो लव्ज़
कुछ ऐसा कह दो
दिल से दिल के बँटवारे
पट जाए सारी खाईं
कुछ ऐसा कह दो
हाल बड़ा बैचैन तुम बिन
मेरे मन को चैन मिलें
कुछ ऐसा कह दो
माथे पर चिंतन कि रेखा
मिट जाए हर निशान
कुछ ऐसा कह दो
कब तक यह अंजानापन
हो अपनी अलग पहचान
कुछ ऐसा कह दो
मन हलचल की ओट
थम जाए तूफान
कुछ ऐसा कह दो
जीवन है निश्प्राण प्रिय
दे दो शब्दों में प्राण
प्रिय अब कुछ ऐसा कह दो
दिल सुनने को प्रेरित है
ढल ना जाए शाम
प्रिय कुछ ऐसा कह दो

बन्द लिफाफा

बन्द लिफाफा है किस्मत का
जोर क्या कल पर किसी का
जिंदगी दिखाती रोज़ नया तमाशा
कभी जीत तो कभी मिलें हताशा
जीतने का जुनून हुआ फिज़ूल 
पर हारने पर हर न कर कबूल 
है जरुरी हर तजुर्बा जिंदगी का 
मान ले जान ले यह फलसफा
अपने हाथ सिर्फ़ कोशिसो के रास्ते
कामयाबिया सिर्फ़ सिरफिरो के वास्ते 
बन्द लिफाफा है किस्मत का
जोर क्या कल पर किसी का

ऐ मुसाफिर

माना लाख कठिन है रास्ते।
पर ऐ मुसाफिर तुझे तो चलना होगा।।
जद्दोजहद है जिंदगी के वास्ते।
फिर भी रौशन चिराग सा जलना होगा।।
कदम रख आहिस्ते आहिस्ते।
जंगे मैदान में संभल के उतरना होगा।।
नजर हटते ही होते है हादसे।
हालत के हर हाल से संभलना होगा।।
ईमान बेघर बेइमान को नमस्ते।
माहौल हमसे ही तो हमे बदलना होगा।।
इंसानो के बीच कहा फरिश्ते।
हैरान क्यू तुझे लोगो सा ढलना होगा।।
वक्त न गुजरे जाए हाँफते काफ्ते।
नई रफ्तार से कुछ कर गुजरना होगा।।
गर बदल सके तो बदल सुरते।
वरना जमीरे-कत्ल ख़ुद को मरना होगा।।
माना लाख कठिन है रास्ते।
पर ऐ मुसाफिर तुझे तो चलना होगा।।

हद की दीवानगी

भीगी आँखों में ऐहसासो के बादल
हद की दीवानगी लोग कहते पागल
मै नम आँखों से तेरा नाम लिखूँ
बहते अरमानो की बरसात लिखूँ
दिल वार दिया बस तुझ पर साजन
तुम से ख्वाबों की तस्वीर मनभावन
कैसे तुमको दिल का हाल लिखूँ
तड़पन पर हाय क्या मलाल लिखू
मेरी चाहत बस तुझ संग हर पल
सनम तू मेरी और मै तेरा केवल
तुझे सदियों का सच्चा प्यार लिखूँ
कितना मुश्किल यह इंतज़ार लिखूँ
सागर से भी गहरा प्यार है जानम
मेरी सांसो में तेरा नाम तबस्सुम
मै अपने दिल के जज़्बात लिखूँ
ख्वाईशो की हर सौगात लिखू
भीगी आँखों में ऐहसासो के बादल
हद की दीवानगी लोग कहते पागल
मै नम आँखों से तेरा नाम लिखूँ
बहते अरमानो की बरसात लिखूँ