Saturday, November 9, 2013

दीपोत्सव

रौशनी से नहायी एक बस्ती
आतिशी अंदाज और मस्ती
दीपोत्सव का आगाज करती
 दुलहन सी सजती सवरती
पर दूर कही जिंदगी सस्ती
 दीपावली का इंतज़ार करती
खुशिया जहा धुंध सी मिलती
वह नाकामियों की बस्ती
तस्वीर के दो पहलू
 किसी को ख़ुशी किसीको मायूस मिलती
दुखती रग पूछती
यह हालात ऐ तस्वीर क्युँ नही बदलती
पर्व कि रोशनी क्युँ पता बूझती
क्युँ तंग गली तंगियत से जूझती
क्युँ रौशनी से नहायी एक ही बस्ती
क्युँ नही हर तरफ
आतिशी अंदाज और मस्ती
सभी को शुभ हो दीपावली
मिले हर मुमकिन हर खुशी
पोछ दो हर आँख से आंसू
ढक दो हर होठ पर हसी
रौशनी हर अँधेरे मिटा दे
ईश्वर हर उम्मीद लौटा दे
बस अहले दिल यही मुबारक दुआ है निकलती
रौशनी से नहायी हो हर एक बस्ती
हर तरफ जज्ब हो जाए
आतिशी अंदाज और मस्ती.......................

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