Saturday, December 29, 2012

श्राप


  1. जाते जाते अँगरेजों के, यह किसका श्राप घर कर गया!
    नाम की आजादी पर लोकतंत्र कुतंत्र में बदल गया!
    कहने को इनमें मतभेद तो होते है पर मनभेद नहीं होते
    सियासियों के दावपेच में दल दल के अंतर्विरोध नहीं होते
    लोकपाल जनहित में था सो हर दल एकमत विरोध ...कर गया
    एफ.डी.ए था खद्दर के माकूल इसी लिए एकमत बन गया
    विरोध के दिखावे हुए और महँगाई का स्तर बड़ गया
    गरीबी में आटा गीला उस पर सवाया तीर चल गया
    फिर आम आदमी को क्या फर्क की कौन मंत्री बन गया
    आम घास जो बना वही देश में जी का जंजाल बन गया
    जाते जाते अँगरेजों के, यह किसका श्राप घर कर गया!
    नाम की आजादी पर लोकतंत्र कुतंत्र में बदल गया!See more

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