Wednesday, November 30, 2011

न्यूडिटी

कही दिखावे के बाज़ार कि नुमाइश के खातिर!
और कहीं मुश्किल हालातों ने किया जगजाहिर!
किसी से मत पूछ ऐ दोस्त यह दस्तूर क्यू है!
कही मजबुरिया तो कहीं शौक-ए दस्तूर यु है!
कोई तन से है नंगा और कोई मन से है नंगा!
यह हालत बद से बत्तर ही होंगे!
क्युकी मन से न तू ही है चंगा न मै ही हूँ चंगा!
सभी हाथ धोते मिलेंगे यहा, जब तक मिलेगी बहती हुई गंगा!
फिर काहे को पूछें किसी से भाइ, न्यूडिटी में नहीं जब कोई पंगा!
क्युकि कोई तन से है नंगा और कोई मन से है नंगा!

No comments:

Post a Comment