Thursday, May 30, 2013

गुनाहगार

असली में जो गुनाहगार है
 वही सिपहलसार है
किसकी नियत तलाशिये
 सबके सब बीमार है
सरफरोशी चले गए
अब हमवतन भी लाचार है
सब अपनी अपनी कहते है
 दूजे की दुश्वार है
बीते दिन जब चाँदनी के
तो अब अंधेरी रात है
तेरे मेरे में सिमट गयी
 ये अपनेपन की बात है
कौम बड़ी इंसानियत छोटी
 फीके हर जज्बात है
छुरे और तमंचे थामे,
 जुदा एकदुजे के हाथ है
कौन कहे लोग वही
 जिनका चोली दामन साथ है
बीते दिन जब चाँदनी के
तो अब अंधेरी रात है
असली में जो गुनाहगार है
 वही सिपहलसार है
किसकी नियत तलाशिये
 सबके सब बीमार है 

रंग नफरत का


धरती के रंगों में घुला रंग नफरत का
और दूर हुआ मन से नशा मुहब्बत का
कभी गलियों में होता था रंग का हुड़दंग
 सर पर चड़ बोलती थी तबीयत की भंग
 अब साथ में त्यौहार भला कैसे मनाये
 जकड़ी हुई देखो धर्मो की झूठी मान्यताये
जाने कहा लुप्त हुयी प्रेम भरी आस्थाये
 मन की तसल्ली को कलफी कामनाये
 रोकती जो टोकती प्यार की ठिठोली
 अब तो बस यादों में बसती है होली
अबीर और गुलाल भरी बच्चो की झोली
 जातपात भुलभाल मस्तों की टोली
 यौवन में डूबी वह सुरतिया भोली भोली
 काश बीते दिन आते और बहती फुआर
 फिर से संग साथ की, चलती बयार
 आपसी रंजिशो का न होता प्रहार
 तो होली तो होली, मनता हर त्यौहार
  1. ...

मुझ पर हँसने वालों,

ऊँचे मकानों से निकाल कर मुझ पर हँसने वालों,
 मुझ पर बेघर कहं कर यू फब्बतिया कसने वालो,
 जाने क्यू तुम्हे ईट पत्थरो के मक़ाँ पे इतना गुमान है,
गौर से देखो तो मेरी छत सारा का सारा आसमान है,
होंगे तुम्हारे महल रोशन पर चिराग घिरे उम्र के सवालों से,
 जबकि मेरी छत रोशन है अनगिनत अजर अमर सितारों से,
 मैंने चाँद का गुमान कभी चहरे पर आने ही ना दिया,
 और तुम्हे फक्र है उस रौशनी का जो आज बूझता सा दियाँ,
तंग मकानों से निकल कभी खुली हवा से दिल गुलजार करो,
 है जमाने से दोस्ती अच्छी, जिंदगी अकले ही यू बेकार न करो,
 तमाम उम्र खुद के साथ ही दिन रात बिताने वालो,
 आज अपनी ही हँसी पर न खुल के हँसने वालो,
 तुम्हे तुम्ही से मिलने को रोकता तुम्हारा दिल-ए फरमान है,
 ह्म्हारी छोड़ो हम्हारे दिल में तो सारा का सारा जहान है
 ऊँचे मकानों से निकाल कर मुझ पर हँसने वालों,
 मुझ पर बेघर कहं कर यू फब्बतिया कसने वालो,
 जाने क्यू तुम्हे ईट पत्थरो के मक़ाँ पे इतना गुमान है,

गौर से देखो तो मेरी छत सारा का सारा आसमान है,

प्यार की कशिस

तुम्हारे प्यार की कशिस में
 मै इस कदर मदहोश हूँ
 की जिंदगी की आंखरी साँस तक
 होश में आना नहीं चाहता,
 तुम्हारे शब्दों में पिरोये हुए
 अपनेपन के अनमोल मोती,
जिन्हें बेशकीमती जवाहरात की तरह
 मै ता-जिंदगी खोना नही चाहता,
 थकान और शिकन के पलों में
 तुम ताजगी और ताकत हो
 सफर के किसी मोड़ पर हमदम
 मै तुम्हे खोना नही चाहता,
 आज वादा करे एक दुसरे से
 आँखों में एक ही सपना हो
 जिसमे तेरी खुशी न हो शामिल
वह स्वप्न सँजोना नही चाहता
 तुम प्यार हो, तुम अनमोल हो
 हां तुम ही मेरी चाहत हो
हर जन्म तेरा ही साथ मिलें

 अब दिल किसी और का होना नहीं चाहता………………….
  1. ...

तुम्हारी याद

वक्त बेवक्त तुम्हारी याद
 मुझे तड़पाती रुलाती तेरी याद
 तुम्हे भी आती होगी कभीकभी
भूली बिसरी पर मेरी याद
मै लिखता तेरा नाम
अनगिनत कोरे कागज पर
 पर आँखों से बहते आँसू,
फिर कोरे के कोरे करते,
 बह जाते हर अक्षर के साथ
 और रह जाती बस तेरी याद,
 नींद कभी की ओझल है
 मन कि दशा कहूँ क्या आज
 सोते जागते मन में बसती
 प्रिय विरह कि निष्ठुर याद,
 तुम किस कारण बँधी हुयी
इसका मुझे अन्देशा नहीं
पर मन मेरा यह कहता है

मन तेरे भी बसी हुयीं है मेरी याद……………….
  1. ...

ऐ पवन मेरा संदेश देना


ऐ पवन मेरा संदेश देना
और…….
 उनकी भी खुश ख़बर लेना
 ऐ मंद बहती पवन
अपने साथ तुम समेट लेना
महक उनके एहसास की
मेरे प्रिय के आस पास की
मै अकेलेपन से जीत जाऊ
अगर उनका शुभ संदेश पाऊ
तो लौटती पुरवाई में
मुझे यह उपहार ख़ास देना
वतन कि उम्मीद है हमसे
 अभी वक्त माटी को देना है
कफन सर पर बाधा है
पर हृदय में उनके प्यार का गहना है
माना अभी जिस्म कि दूरी है
 पर दिल में सदा उनको ही रहना है
 मेरे स्वप्न, मेरी सोच, मेरी अनभूति
प्रारंभ भी उनसे और अंत भी उनसे
प्रकृति कि दूरियां भी न कर सके दूर
मेरी यादो का तुम हवाला देना
अपने भीने पवन के झोको से
उनके भीगे नयनो को सुखा देना
मै जल्दी वापस आउंगा
 उनकी आँखों में यह खुशी का
 मिलनमय एहसास देना
 ऐ मंद बहती पवन
मेरा यह संदेश देना
 और ……………

 उनकी भी खुश ख़बर लेना
  1. ...

“हिदी है हमवतन है


मजहब नही सिखाता आपस में बैर रखना”
 “हिदी है हमवतन है हिंदोस्ता हम्हारा हम्हारा”
 लौट के आ जाए अगर बीते दिन
फिर से मिल जाए अगर हिंदू मुस्लिम
 जिंदगी फिर खुली साँस ले हवाओं में
अगर घुल जाए मोहब्बत फिजाओ में
 अमन और चैन की बाते सिमटी यादों में
 क्यू नफरते पनप गयी इस कदर इरादों में
इस दिल की तलाश कब मुकम्मल होगी
जिंदगी को हर जिंदगी में कब मुहब्बत होगी
 हमारी खुशी हो और तुम भी हो शामिल
मुझे भी साथ लेने के जब समझो काबिल
 इतिहास दोहराये मिला कदम से कदम
 हैरान कर दे फिर से पूरब और पश्चिम
 आमीन ऐ खुदा दुआ कबूल कब तेरे बिन
तू ही दूर सकता रिश्तों कि हर उलझन
 तो लौटा दे हम्हे वह बीते हुए दिन
जब मिल जाए ज़ुदा दो भाई हिंदू मुस्लिम
 आमीन..............