Thursday, May 30, 2013

माँ तुझे कोटी कोटी प्रणाम


हे माँ तुझे कोटी कोटी प्रणाम, हर दिवस करु मै बस तेरे नाम
मात् दिवस प्रतिदिन इन रगो में बहता, एक दिवस भी नहीं विराम
 क्युकि………………
 नौ माह कि अपार प्रसव पीड़ा , और मन भीतर जीवन देने का बीड़ा
 माँ हर दर्द सहेज कर भी, तुने ही मुझमे साँसें भर दी
अपने जीवन का प्रथम अध्याय, हम तेरे ममतामयी शब्दों से पाये
माँ विधयालय की तू प्रथम चरण, तेरे स्नेह से हुआ पालन पोषण
 मेरी खुशियों में जो ढूँढे ख़ुशियाँ, तुने जीवन पर्यंत बस दिया दिया
 माँ मुझमे तेरे ही अनमोल संस्कार, जो कर रहे आज भी परम उद्धार
 ईश्वर का जीवंत स्वरूप है तुझमें, क्यूँकि तुझसे ही साँसें है मुझमे
 माँ तेरी आँखों में मै पला बढ़ा, हे जीवन दायनी मै तेरा कृतार्थ बड़ा
 माँ उपरांत नौ माह कि प्रसव पीड़ा, से उपज यह अलख संसार बना
 माँ तेरी ममता का कोइ मोल नहीं, ममता के ऋण का जग में तोड़ नही
 क्युकि………………
 नौ माह कि अपार प्रसव पीड़ा , और मन भीतर जीवन देने का बीड़ा
 जीवन मृत्यु के मध्य उपजती, माँ की आँखों में संतान है बसती
हे माँ तुझे कोटी कोटी प्रणाम, हर दिवस करु मै बस तेरे नाम
मात् दिवस प्रतिदिन इन रगो में बहता, एक दिवस भी नहीं विराम………….
 Happy Mother’s day (365Day)
  1. ...

माँ


महामंडित मार्तदिवस करदो


माँ के कर्ज़ में तो डुबा यह सारा का सारा संसार है!
माँ ही है जिसने दिया बिना ब्याज प्यार ही प्यार है!
धरती पर जीवन की अमिट धारा बहाने वाली
कैसे बनी बेटा और बेटी के अन्तर को लजाने वाली
 इस दिवस पर इस मनन कि भी आज जरूरत है
माँ तो माँ है उससे तो बेटा बेटी दोनों को मोहब्बत है
क्यू बेटी कहती मा मुझे भी इसी कोख में जनने दो
नौ मास की अवधि में परिपक्वता से पलने दो
 जीवन पाई तो मै भी संसार रचयिता कहलाउंगी
 वर्ना भ्रूण परिक्षण पश्चात नाहक बलि चढ़ जाऊँगी
 माँ मेरी भी सांसो में साँसें भर दो
 है अभी सूनी शिराये रगो में लहू भर दो
 अनमोल दिवस की बेला पर मेरी माँ
मेरा भी महामंडित मार्तदिवस करदो
  1. ...

विद्रोह करो विद्रोह करो…

  1. अन्याय को सहना अब आदत है
     बिन माँगें मौत शहादत है
     यूँ तेरा अपने ही अपने में रहना 
    दिल से दिल की बात ना कहना 
    क्यू अपने ही जज्बातो पर पहरे 
    अरमानो के रस्ते ठहरे ठहरे 
    धुलते मिटते क्यू ख्वाब सुनहरे 
    और स्थिल सब जीवन के फेरें 
    जीवन की आशा कोई गुनाह् नहीं 
    पर बिन तेरे नवजीवन का प्रवाह नहीं
     मौन अधर को अवसर कब होगा 
    कब तेरा हृदय भी अग्रसर होगा 
    विच्छिप्त मन को अब शांत करो
     कुंठित तन में नवकेतन कांत भरो 
    खुल कर कहना विद्रोह नहीं 
    हा घूँट कर रहना आरोह नहीं
     तो जो उचित लगे बस वोह करो
     सहने की परिपाटी बदलो 
    विद्रोह करो विद्रोह करो……………
    1. ...

एक नयी रचना मै आपके नाम कर दूं

लिखने को जब मिला कुछ भी नही
मन के किसी कोने में खयाल आया तभी
चलूँ कुछ विचार बाहर से ले आऊ
और उन्हें शब्दों का जमा पहनाऊ
दिखी सुनहरी शाम में विचरती फैशन की दुनिया
क्लब के कल्चर में ढली नवोदित जिंदगियां
शराब और शबाब के बीच की पनपती गंदगिया
घुटते रिश्ते जहा दौलत और शोहरत के दरमिया
कोयला, रेल , घोटालों, चुनाव और जाने क्या क्या
 निकममी शासन और सत्ता कि दिखी हर बड़ी हस्तियां
ना मिलें वह् पुराने गुलमोहर के गुच्छे
वह कागज कस्ती को खेलते हुए बच्चे
ना मन्दिर कि घंटी न मस्जिद कि आँजने
 वह् पुरानी गली मोहल्ले के ताने और बाने
हम्हारी यादों में थे जो गुजरे जमाने
वह् चाह के भी न मिलें ठौर ठिकाने
सच्चाई कि जगह लव्जो में पलते बहाने
 देख् घर को वापस मै आया
कुछ न मिला जिसे खुशियों में लिख दूं

एक नयी रचना मै आपके नाम कर दूं
  1. ...
    1

हमसफर तुझे पाकर


मेरे कदमो ने चुनी कुछ राहे
वजूद तब हो जब तू भी आए
हमसफर तुझे पाकर मंजिले मिल जायेंगी
दूरियां कितनी भी हो मुश्किलें कट जायेंगी
वक्त के साथ मैंने कुछ लम्हे चुराये
हासिल तब जब तू साथ वक्त बिताये
तेरा साथ हो तो सदिया भी कट जायेंगी
वक्त के हाथ से तन्हाईयाँ फिसल जायेंगी
कल कि तसवीर के खाखे है बनाए
वह् तस्वीर हो मुकम्मल तू जो आए
किस्मत की रोशन लकीर, हथेलियां पा जायेंगी
एक तेरे आने से किस्मत बदल जायेगी
कितने ही ख्वाब आँखों में सजाये
मेरी आंखो में बसी तेरी ही सदाये
तुम्हारी बंद पलके जब ख्वाब असल कर जायेंगी
तब खुली आँखें भी हँसी सपनों को जी पायेंगी
 इंद्रधनुश ने जो सात रंग है बिखराये
उनमे अगर तेरा रंग भी मिल जाए
 तो बेरंग सी इस जिंदगी में रंगीनियां छा जायेगी
जिंदगी कि हर सुबह रात सज सँवर हो जायेगी
 तेरा साथ हो तो सदिया भी कट जायेंगी
  1. ...

एक आवाज़

एक आवाज़ जो तुम्हारे हाल को पूछें 
एक कदम जो हरदम तेरा साथ दे दे
एक बात जो अपनेपन का एहसास दे
उस तलाश के कठिन से कठिन फ़ासले
 तय करने को जब दिल तेरा आमादा हो
ख़ुद से उस अजनबी पर भरोसा ज्यादा हो
जिसे न देखा बस ख्यालो में क़रीब पाया
अनजान से चहरे में हमसाया सा पाया
इस भीड़ में किस मोड़ पर होगी मुलाकात
तलाश में गुजरेंगी कितनी सुबह कितनी रात
 मायने नहीं रखती जिसके खातिर कोई बात
बस दिलो के तार और उमड़ते जज़्बात
 एक अजनबी से आतुर करने को मुलाकात
यह उम्र की दहलीज़ पर उमगों की सौगात
जो ढूँढती है....
एक आवाज़ जो तुम्हारे हाल को पूछें
 एक कदम जो हरदम तेरा साथ दे दे
   एक बात जो अपनेपन का एहसास दे
  1. ...