पलाश के फूलों सी ताजगी,तेरी अदाओं में अजब रवानगी,फिजाओ पर शबनमी ओस कि बूँदें,भी तेरे भीतर की ताजगी को ढूँढे,तेरे नजरों में एक शरारत,जो फिदा कर गई वह नज़ाकत,जिसने भी देखा वह हुआ घायल,
तेरी सुरमयि आँखों का कायल,
समुंदर सा तूफान तेरी आँखों में,
जहा का हर सुकुन तेरी बाहों में,
रेत पर तेरा नाम लिखना,
कभी रूबरू कभी ख्वाबों में मिलना,
तितलियों के रंगों से रुपैहली,
इस जहाँ की नायाब पहेली,
तुझे देखा तो यह खयाल आया,
तारीफ उस खुदा कि जिसने तुझे बनाया!
नवचेतना आभास है,व्याप्त हास विलास है,प्रकृति खिली अनायास है,अनूठा प्रयास है,मौसमी अनुराग है,प्रतीत सौंदर्य प्रयाग है,बौर खिले बाग है,बसंत का बिहाग है,शीत ऋतु हुई विदा,ग्रीष्म लीन सम्पदा,सर्द रात्रि यदा कदा,
दिनकर पर हुई फिदा,
मन मधुर हुआ अटल,
मन में बसी नभ धरा अचल,
खिल उठे कमल दल,
सौंदर्यदामिनी प्रबल,
नवऋतु सुस्वागतम,
सुस्वागतम.....सुस्वागतम....
जीवन क्या है,
यह विषय वस्तु समझने लगा!
जितना समझने लगा,
उतना ही ज्यादा उलझने लगा!
बौराया देख वर्चस्व कि लड़ाई,
मन बुझता क्यू यह मारा मारी है!
अनिंयंत्रित अपना ही आपा,
क्यू जीवन एक लाचारी है!
कैसे शांत लहर से जीवन में!
आती भूख कलह बेकारी है!
वासना और पिपासा भरी!
मनु कि अमानुस बीमारी है!
हर मन में विकसित द्वेषभावना,
जो अंतर्मन पर भारी है!
कब कैसे बदलाव हुआ,
कैसे जीवन अर्थ बदलने लगा!
जीवन पथ पर चलते चलते,
जीवन का हर पल खलने लगा!
चेतावनी हुई चुनौतिया,
और मन जीवन से डरने लगा!
एक साँस मै भी जी लू
क्यू मन से यह भाव उतरने लगा
जीवन क्या है,
यह विषय वस्तु समझने लगा!
जितना समझने लगा,
उतना ही ज्यादा उलझने लगा!
क्या हासिल किया तमाम जिंदगी
जब किसी के दिल में जगह न हो सकी
माना रैन बसेरा तो बसाया तूने
पर घरौन्दे में जब खुशी समा न सकी
आबादी में तेरा लाख आना जाना
पर कोई गली भी तुझे पहचान न सकी
तेरी तिजोरी हीरे जवाहरात भरी
फिर भी जो तेरी भूख मिटा न सकी
अपनी हँसी तो दिल खोल हँसा
पर तेरी कमी किसी को रुला न सकी
ऐसे जीवन को क्या जीना यार मेरे
जो जीने का सही मायेने समझा न सकी
हरहाल खाली हाथ ही होगी वापसी
मौत के बाद किसी कि सियासत हो न सकी
थी आरज़ू मेरी तुम साथ हो मेरे!
थी आरज़ू मेरी हम साथ हो तेरे!,,
पर नहीं मंजूर तुमको तो तेरी मर्जी!
ना रोकेंगी तुझे मेरी बंदिशे खुदगर्जी!
मुझे पता है तेरी यादे सोने न देगी!
यह तन्हाईयाँ मुझे जीने न देगी!
पर दुआ तुझे खूबसूरत ख्वाबों की ताबीर मिलें!
जो हरहाल में तेरा साथ न छोड़ें वह हाथ मिलें!
दिल-ए दर्द को जगाती मेरी आवाज़ न सुन!
तुझे नसीब हो गुनगुनाते जमाने कि हर धुन!
हर आहट पर तेरा खयाल बे-वजूद सही!
तू आए य ना आए बेवजह इंतज़ार सही!
मेरे हमदम ये दर्द ही सही पर हक है मेरा!
मेरी यादों पर भला कब जमाने का पहरा!
दिल कि इसी पीर के साथ जी लूँगा!
तेरे खातिर गमों का जहर पी लूँगा!
ए सनम बिन साथ तेरे!
हम थे तेरे, हम है तेरे, हम रहंगे तेरे!
थी आरज़ू मेरी तुम साथ हो मेरे!
थी आरज़ू मेरी हम साथ हो तेरे!,,
समय के आगोश में कई मंज़र बदल जाते है,
जहा रेत का था बसेरा वहा समंदर नजर आते है,
तूफान किसी दस्तक का मोहताज नहीं यारों,
सपुर्ते खाक के बाद फनाह तख्तो ताज यारो!
यु भागती जिंदगी कब कैसे ठहर जाती है!
जिंदगी के सच कि बातें बड़ी बुनियादी है!
सयाने साहिल भी लहरों में फँस डूब जाते है!
पिछली सभी सोच के हर मायेने बदल जाते है!
तमाम यादे, ख्वाहिशे, ख्वाब अधुरे रह जाते!
दिलो के हर अरमान आँसुओं में बह जाते है!
फिर किस बात का गुमान अये जिंदगी!
क्यू कुछ से रंजिशें क्यू कुछ से बंदगी!
क्यू हर शख्श से से दिल नहीं मिल पाते!
क्यू समय की सरगम पर छेड़े तार बदल जाते!
तेरे अपने बस जब कुछ नही अख्तियार यारों!
जो मुमकिन नहीं फिर उसका क्यू इंतजार यारो!
तूफान किसी दस्तक का मोहताज नहीं यारों,
सपुर्ते खाक के बाद फनाह तख्तो ताज यारो!
जीवन में संकल्पों का बहुत महत्व है।
झुलसाये ये सुर्ख आग चलो उस से पहले
आओ उसी आग के शोलों से मिलकर खेले
माना गहराई समुंदर की पता नहीं अब तक
तो चलो गोता लगाए अंतहीन पाताल तलक
ते़ज आँधिया न हिला दे कहीं ज़र्रा ज़र्रा
क्यो न हवा के रुख रम जाए इस तरह
क्युकी बिना तपे लोहा भी सख्त नहीं होता
और बिना चोट सोना भी आभूषण नहीं होता
तो क्यो न भाग्य के हर फैसले पर मुहर लगाए
बेबसी का रोना क्या, जो बस में करते जाए
क्यो ना हार को हराने का मजा उड़ाया जाए
नासाजी हर वक्त नहीं कब तबीयत बदल जाए
अपने मिजाज कि इबादत ख़ुद ही लिखी जाए
कोई क्या जानेगा, पहले खुदको ख़ुदही जान जाए
अपने रहते ही अपना इतिहास लिखा जाए
खुदी को करे बुलंद इतना कि खुदा भी रहम खाए
यह डर ही है जो फ़ासले मिटाते मौत के नीरज
फिर मौत से बेहतर चुनौतियो को गले लगाया जाए
भरोसा ख़ुद पर अगर तो शायद जिंदगी बदल ही जाए
अगर सही सोच से उठे कदम तो क्यू पीछे लेले
कम से कम अपने भरोसे पर भरोसा कर ले
झुलसाये ये सुर्ख आग चलो उस से पहले
आओ उसी आग के शोलों से मिलकर खेले