Thursday, May 30, 2013

“हिदी है हमवतन है


मजहब नही सिखाता आपस में बैर रखना”
 “हिदी है हमवतन है हिंदोस्ता हम्हारा हम्हारा”
 लौट के आ जाए अगर बीते दिन
फिर से मिल जाए अगर हिंदू मुस्लिम
 जिंदगी फिर खुली साँस ले हवाओं में
अगर घुल जाए मोहब्बत फिजाओ में
 अमन और चैन की बाते सिमटी यादों में
 क्यू नफरते पनप गयी इस कदर इरादों में
इस दिल की तलाश कब मुकम्मल होगी
जिंदगी को हर जिंदगी में कब मुहब्बत होगी
 हमारी खुशी हो और तुम भी हो शामिल
मुझे भी साथ लेने के जब समझो काबिल
 इतिहास दोहराये मिला कदम से कदम
 हैरान कर दे फिर से पूरब और पश्चिम
 आमीन ऐ खुदा दुआ कबूल कब तेरे बिन
तू ही दूर सकता रिश्तों कि हर उलझन
 तो लौटा दे हम्हे वह बीते हुए दिन
जब मिल जाए ज़ुदा दो भाई हिंदू मुस्लिम
 आमीन..............

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