Thursday, May 30, 2013

एक नयी रचना मै आपके नाम कर दूं

लिखने को जब मिला कुछ भी नही
मन के किसी कोने में खयाल आया तभी
चलूँ कुछ विचार बाहर से ले आऊ
और उन्हें शब्दों का जमा पहनाऊ
दिखी सुनहरी शाम में विचरती फैशन की दुनिया
क्लब के कल्चर में ढली नवोदित जिंदगियां
शराब और शबाब के बीच की पनपती गंदगिया
घुटते रिश्ते जहा दौलत और शोहरत के दरमिया
कोयला, रेल , घोटालों, चुनाव और जाने क्या क्या
 निकममी शासन और सत्ता कि दिखी हर बड़ी हस्तियां
ना मिलें वह् पुराने गुलमोहर के गुच्छे
वह कागज कस्ती को खेलते हुए बच्चे
ना मन्दिर कि घंटी मस्जिद कि आँजने
 वह् पुरानी गली मोहल्ले के ताने और बाने
हम्हारी यादों में थे जो गुजरे जमाने
वह् चाह के भी मिलें ठौर ठिकाने
सच्चाई कि जगह लव्जो में पलते बहाने
 देख् घर को वापस मै आया
कुछ मिला जिसे खुशियों में लिख दूं

एक नयी रचना मै आपके नाम कर दूं
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