Saturday, November 9, 2013

रौशनी

दिल भी जलाया की तनिक रौशनी हो जाए
निगाहें मौत से हटायी की जिन्दगी हो जाए
दिल मानता ही नही की अभी हार है
आखरी उम्मीद का अभी भी इंतज़ार है
मेरे लड़खाड़ाते कदमो ने कसम है खाई
जिन्दगी जो अब तक दौड़ न पाई
वक्त-ऐ सफ़र की हर बुनियाद हिला देंगे
हर हार को जीत की लिखावट से मिटा देंगे
कितने मौके चूके क्या हिसाब करू
वल्द इसके नए मौके कामयाब करू
चलो मिलके जीत को आमीन कह दिया जाए
मायूसी माहौल को अलविदा कर लिया जाए

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