Saturday, November 9, 2013

सोने की बरसात

हिन्दुस्तान की जमी से टनों सोने की बरसात का दावा है
 एक संत के स्वप्न पर जोशे-ऐ खोज का उमड़ा लावा है
नही समझते की खिलौने स्वपन के आँखों में खेले तो बेहतर है
वरना सवाल उलझते है और जबाब के हर पहलू बेअसर है
हाथ की तकदीर अगर कल बदलती तो इंसान के कई हाथ होते
बिना नींद के भी मुह ढक कर हम आराम से सोते
बिना मेहनत कब सबेरा किसी के नसीब को
चलो देख लेने दो सपना किसी गरीब को
अभी भीड़ उस और जिस और ख्वाबो की चली हवा है
सबको पता है स्वप्न भला कब किस मर्ज की दवा है
गरीब के सपने जिसमे टनों सोने की बरसात का दावा है
 कुछ पल के लिए ही सही पर उमड़ा खोज का लावा है

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