Wednesday, July 31, 2013

अब अंधेरी रात है



  1. Photo: हर किसी से नफरत हर किसी से बुराई
जिंदगी जाने किस मोड़ पर चली आई 
भरोसे की उठी मइयत, हाथों में जुदाई
आग जो भड़की वह हमने ही थी लगाई
कौन दे सहारा जब हुआ दिल ही हरजाई
एक दूजे को दफनाने की कसम जो खाई
झूठी मोहब्बत कि दिल ने रसमें निभाई
अकेलेपन की जिंदगी न जाने क्यो भाइ
क्योँकि अकेलेपन की जिंदगी न हमको भाइ
न अकेलेपन की जिंदगी न तुमको भाइ
फिर भी गंदी सियासत की करी कराई
पर हमने और तुमने मुहर है लगाइ 
नतीजा..............
हर किसी से नफरत हर किसी से बुराई
जिंदगी जाने किस मोड़ पर चली आई.............

    असली में जो गुनाहगार है वही सिपहलसार है
    किसकी नियत तलाशिये सबके सब बीमार है
    सरफरोशी चले गए अब हमवतन भी लाचार है
    सब अपनी अपनी कहते है दूजे की दुश्वार है
    बीते दिन जब चाँदनी के तो अब अंधेरी रात है
    तेरे मेरे में सिमट गयी ये अपनेपन की बात है
    कौम बड़ी इंसानियत छोटी फीके हर जज्बात है
    छुरे और तमंचे थामे, जुदा एकदुजे के हाथ है
    कौन कहे लोग वही जिनका चोली दामन साथ है
    बीते दिन जब चाँदनी के तो अब अंधेरी रात है

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