Wednesday, July 31, 2013

आँखों में रची बसी

    1. ...
      Photo: चाह के भी भूल न सकूँगा उन सम्भारो को 
आँखों में रची बसी प्रिय तेरी मिलन बहारो को 
देह को रोमांचित कर देने वाली धारो को 
बुझा भी न सकूँगा विरह के शूल अंगारो को 
तेरी याद आज भी हृदय पटल पर अंकित है 
तेरी हर बात मन मस्तिष्क पर रेखांकित है 
अंतहीन दर्द का रिश्ता तुझसे मन रोमांचित है 
अन-अनुभूत अछूते भावों का दर्पण सुशोभित है
कैसे भूलूं सँग बिताये अनमोल नजारो को 
हृदय गगन पर चमकते अनगिनत सितारों को 
तुझ संग बीते कल जैसे हर्षित त्योहारो  को
प्रणय के पुष्पों से चुनें हुए रंग बिरंगे हारो को
चाह के भी भूल न सकूँगा उन सम्भारो को 
आँखों में रची बसी प्रिय तेरी मिलन बहारो कोचाह के भी भूल सकूँगा उन सम्भारो को
      आँखों में रची बसी प्रिय तेरी मिलन बहारो को
      देह को रोमांचित कर देने वाली धारो को
      बुझा भी सकूँगा विरह के शूल अंगारो को
      तेरी याद आज भी हृदय पटल पर अंकित है
      तेरी हर बात मन मस्तिष्क पर रेखांकित है
      अंतहीन दर्द का रिश्ता तुझसे मन रोमांचित है
      अन-अनुभूत अछूते भावों का दर्पण सुशोभित है
      कैसे भूलूं सँग बिताये अनमोल नजारो को
      हृदय गगन पर चमकते अनगिनत सितारों को
      तुझ संग बीते कल जैसे हर्षित त्योहारो को
      प्रणय के पुष्पों से चुनें हुए रंग बिरंगे हारो को
      चाह के भी भूल सकूँगा उन सम्भारो को
      आँखों में रची बसी प्रिय तेरी मिलन बहारो को

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