Wednesday, July 31, 2013

फैशन की दुनिया

  1. लिखने को जब मिला कुछ भी नही
    मन के किसी कोने में खयाल आया तभी
    चलूँ कुछ विचार बाहर से ले आऊ
    और उन्हें शब्दों का जमा पहनाऊ
    दिखी सुनहरी शाम में विचरती फैशन की दुनिया
    क्लब के कल्चर में ढली नवोदित जिंदगियां

    Photo: लिखने को जब मिला कुछ भी नही 
मन के किसी कोने में खयाल आया तभी 
चलूँ कुछ विचार बाहर से ले आऊ 
और उन्हें शब्दों का जमा पहनाऊ 
दिखी सुनहरी शाम में विचरती फैशन की दुनिया 
क्लब के कल्चर में ढली नवोदित जिंदगियां 
शराब और शबाब के बीच की पनपती गंदगिया 
घुटते रिश्ते जहा दौलत और शोहरत के दरमिया      
कोयला, रेल , घोटालों, चुनाव और जाने क्या क्या
निकममी शासन और सत्ता कि दिखी हर बड़ी हस्तियां 
ना मिलें वह् पुराने गुलमोहर के गुच्छे 
वह कागज कस्ती को खेलते हुए बच्चे 
ना मन्दिर कि घंटी न मस्जिद कि आँजने
वह् पुरानी गली मोहल्ले के ताने और बाने 
हम्हारी यादों में थे जो गुजरे जमाने 
वह् चाह के भी न मिलें ठौर ठिकाने 
सच्चाई कि जगह लव्जो में पलते बहाने
देख् घर को वापस मै आया 
कुछ न मिला जिसे खुशियों में लिख दूं 
एक नयी रचना मै आपके नाम कर दूं
    शराब और शबाब के बीच की पनपती गंदगिया
    घुटते रिश्ते जहा दौलत और शोहरत के दरमिया
    कोयला, रेल , घोटालों, चुनाव और जाने क्या क्या
    निकममी शासन और सत्ता कि दिखी हर बड़ी हस्तियां
    ना मिलें वह् पुराने गुलमोहर के गुच्छे
    वह कागज कस्ती को खेलते हुए बच्चे
    ना मन्दिर कि घंटी मस्जिद कि आँजने
    वह् पुरानी गली मोहल्ले के ताने और बाने
    हम्हारी यादों में थे जो गुजरे जमाने
    वह् चाह के भी मिलें ठौर ठिकाने
    सच्चाई कि जगह लव्जो में पलते बहाने
    देख् घर को वापस मै आया
    कुछ मिला जिसे खुशियों में लिख दूं
    एक नयी रचना मै आपके नाम कर दूं

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