Wednesday, July 31, 2013

एक उम्र भी लगती है अल्प!

  1. ...
    Photo: एक उम्र तराशने में, जिन्दगी सँवारने में, 
गुजर जाते है अनमोल पल!
हाथ खाली भरने में, कुछ कर गुजरने में, 
फिसल जाते है कितने कल! 
शब्द सम्वाद बटोरने में, हृदय गति टोहने में, 
कम पर जाते सारे विकल्प!
हाथ कुछ आता नहीं, उपाय कोई बताता नही, 
एक उम्र भी लगती है अल्प! 
जीवनभर भाग दौड़, दुविधाओ कि पथ पर आने की होड़!   
कब अर्जुन फस जायेगा, सामने जीवनचक्र का अभेद मोड़! 
यह कैसा विधान है इंसान परेशान है,
राज कर रहा तो कहीं, गिरवी जान है!
किसी मुठ्ठी में दम खम, 
तो किसी का जीवन ही है भ्रम,
किसी की चौखट पे कुंदन के ताले,
किसी को पड़े खाने के लाले! 
किसी पे खुदा मेहरबान है किसी कि दुनिया वीरान है
यह कैसा विधान है इंसान परेशान है,एक उम्र तराशने में, जिन्दगी सँवारने में,
    गुजर जाते है अनमोल पल!
    हाथ खाली भरने में, कुछ कर गुजरने में,
    फिसल जाते है कितने कल!



    शब्द सम्वाद बटोरने में, हृदय गति टोहने में,
    कम पर जाते सारे विकल्प!
    हाथ कुछ आता नहीं, उपाय कोई बताता नही
    एक उम्र भी लगती है अल्प!
    जीवनभर भाग दौड़, दुविधाओ कि पथ पर आने की होड़!
    कब अर्जुन फस जायेगा, सामने जीवनचक्र का अभेद मोड़!
    यह कैसा विधान है इंसान परेशान है,
    राज कर रहा तो कहीं, गिरवी जान है!
    किसी मुठ्ठी में दम खम,
    तो किसी का जीवन ही है भ्रम,
    किसी की चौखट पे कुंदन के ताले,
    किसी को पड़े खाने के लाले!
    किसी पे खुदा मेहरबान है किसी कि दुनिया वीरान है
    यह कैसा विधान है इंसान परेशान है,

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