Thursday, May 30, 2013

तुम्हारी याद

वक्त बेवक्त तुम्हारी याद
 मुझे तड़पाती रुलाती तेरी याद
 तुम्हे भी आती होगी कभीकभी
भूली बिसरी पर मेरी याद
मै लिखता तेरा नाम
अनगिनत कोरे कागज पर
 पर आँखों से बहते आँसू,
फिर कोरे के कोरे करते,
 बह जाते हर अक्षर के साथ
 और रह जाती बस तेरी याद,
 नींद कभी की ओझल है
 मन कि दशा कहूँ क्या आज
 सोते जागते मन में बसती
 प्रिय विरह कि निष्ठुर याद,
 तुम किस कारण बँधी हुयी
इसका मुझे अन्देशा नहीं
पर मन मेरा यह कहता है

मन तेरे भी बसी हुयीं है मेरी याद……………….
  1. ...

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