Thursday, May 30, 2013

गुनाहगार

असली में जो गुनाहगार है
 वही सिपहलसार है
किसकी नियत तलाशिये
 सबके सब बीमार है
सरफरोशी चले गए
अब हमवतन भी लाचार है
सब अपनी अपनी कहते है
 दूजे की दुश्वार है
बीते दिन जब चाँदनी के
तो अब अंधेरी रात है
तेरे मेरे में सिमट गयी
 ये अपनेपन की बात है
कौम बड़ी इंसानियत छोटी
 फीके हर जज्बात है
छुरे और तमंचे थामे,
 जुदा एकदुजे के हाथ है
कौन कहे लोग वही
 जिनका चोली दामन साथ है
बीते दिन जब चाँदनी के
तो अब अंधेरी रात है
असली में जो गुनाहगार है
 वही सिपहलसार है
किसकी नियत तलाशिये
 सबके सब बीमार है 

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