Saturday, December 29, 2012

मानस हित


  1. मानस हित कुछ कीजिये, बिन कीजे सब बेकार
    जीवन यू ही बीता जात है, बचे दिन अब चार
    मोह माया भी अर्थ है जिससे यह संसार
    पूर्ण जगत् से मोह करो जो जीवन का सार
    क्योँकि इस जीवन के बाद बस रह जाए व्यवहार
    कौन है अपना कौन पराया
    ... किसका कौन सदा रह पाया
    जोड़ तोड़ की मोह और माया
    तो जैसे आया तन वैसे जाया
    तो मंथन की इस बेला में कर पुनहा विचार
    रहे बचो से कर अपनो से अपनो का विस्तार
    एकाकी जीवन में सांझी सुबह का हो प्रसार
    मिल बाँट कर कट जाते काँटों के भी अम्बार
    मानस हित कुछ कीजिये, बिन कीजे सब बेकार
    जीवन यू ही बीता जात है, बचे दिन अब चार

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