Saturday, December 29, 2012

तुम सोच हो मेरी


  1. तुम सोच हो मेरी
    जिसे सोच कर मै कभी उदास
    कभी दूर कभी नितांत पास
    कभी एक मीठा एहसास
    तुम्हारी अहमियत इतनी ख़ास
    की मै अपने वजूद को अधूरा पाता हूँ
    ... जब तुम्हारी सोच से दूर जाता हूँ
    नहीं जनता तुम क्या सोचती हो
    पर मै सोचता हूँ तुम जरूर सोचती हो
    वैसे ही जैसे मै सोचता हूँ
    हर पल हर छ्ड़
    क्योँकि तुम सोच हो मेरी........

No comments:

Post a Comment