Monday, August 13, 2012

आजादी की बंदरबाँट


  1. अरे भाई जब से हुयी है शादी तब से ही खड़ी खाट है
    और आज उसी खड़ी खाट कि आठवीं वर्षगाँठ है
    हर समय नजर उनक़ी और आजादी की बंदरबाँट है
    जमाने में चलती मेरी पर घर में हर बात की काट है
    क्योँकि मियां तो बीबी के आगे एक रिजेक्टेड लाट है
    यह तो घर घर ...
    की कहानी है न जाने क्यू मन उचाट है
    अविवाहितो से होती जलन जिनके अभी तलक ठाठ है
    एक हम जिसकी आज शादी की आठवीं वर्षगाँठ है
    क्योँकि जब से हुयी है शादी तब से ही खड़ी खाट है

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