Wednesday, May 16, 2012

एक दोस्त


पलभर की तो हँसी जिंदगी कि जरूरत ही नहीं
जो गम बाँट सके उसकी दिल को हसरत है रही
दर्द सीने में लिए तलासते रहे हमदम
वह कब ले गए जिंदगी के हर ज़ख्म
पता न चला कब जां से जानेजाना हो गए
जो साथ थे वह जरूरतों में अंजाना हो गए
गया वक्त अपने पराये की पहचान दे गया
मिला एक दोस्त जो अंतहीन मुस्कान दे गया
मै खुश हूँ यह आँसू तो लंबी इंत्जारी के है
जो पुराने दर्द थे उनको बहाने की तयारी में है

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