Wednesday, May 16, 2012

मेरी धड़कन


कितना भी दूरी कर लो प्रिय
तुम दिल के इतने पास हो
मेरी धड़कन मेरी सांसो में
तुम मेरा सुखद एहसास हो
सोते जगते खयाल तुम्हारा
प्रिय तुम सलोना ख्वाब हो
फूलो भरे गुलदस्ता बेरंग
तुम मन उपवन का गुलाब हो
मेरी चाहत का आगाज तुम्ही
हा तुम आफरीन आफताब हो
प्यार के लव्जो से सजी हुई
एक दीवानी सी किताब हो
तुम्हे तहे दिल चाहेंगे सराहेंगे
तुम मेरी राहत का जबाब हो
तुमको मानो या मानो प्रिय
मेरे जीवन में तुम ख़ास हो
मेरे मन में रंग भरने वाली
दीवानी मतवाली साँस हो
कितना भी दूरी कर लो प्रिय
तुम दिल के इतने पास हो
मेरी धड़कन मेरी सांसो में
तुम मेरा सुखद एहसास हो

No comments:

Post a Comment