Wednesday, April 11, 2012

खोज तुम्हारी


खोज तुम्हारी जारी है,
इस असीम धरा के आँचल में!
बहते अश्रु की अग्यारी है,
वैसे जैसे बिखरे बरसे बादल में!
तुझपर खुशिया वारी है,
पर तेरी विरह तपिस जीवन में!
मोहे पीणा भी प्यारी है,
पतंगा सा मोहित हो जलु अगन में!
मन हर्ष विरह की क्यारी है,
बसों प्रिय मेरे मनभावन सावन में!
मन में कल्पना तुम्हारी है,
देखे बिन प्रिय प्रतिमा मेरी पलको में!
तुम बिन जीवन अंधियारी है,
चमको रवि बन मेरे सुने आगन में!
तुमसे हर आस् हमारी है,
नवप्राण भरो जीवन की हलचल में!
तुमसे ही ख़ुशियाँ सारी है,
अन्यथा जीवन विलाप प्रतिछण में!
खोज तुम्हारी जारी है,
इस असीम धरा के आँचल में!
बहते अश्रु की अग्यारी है,
वैसे जैसे बिखरे बरसे बादल में!

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