Wednesday, April 11, 2012

खूबसूरती

तुम्हारी खूबसूरती पर,
सोचता हूँ बेहिसाब लिखूँ
कुछ कमी ना रह जाए,
तो चलो एक किताब लिखूँ 
तुम फूलों से कोमल,
क्यू न तुम्हे मै गुलाब लिखूँ 
चाँद भी तुमसे शरमाये,
तो तुम्हे आफताब लिखूँ
हर एक कि तमन्ना तुम,
तुम्हे हर आँख का ख्वाब लिखूँ
तुमसे बेहतर न कोई दुनिया में,
तुम्हे लाजबाब लिखु
फिजाओ में रौनक तुझसे,
तो मै तुझे उंदा शबाब लिखूँ
नशा तेरी आँखों में ऐ कातिल,
मै तुझे शराब लिखु
मन पूछता कभी तो देखोगी,
बता हसीं क्या जबाब लिखूँ

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