Wednesday, April 11, 2012

बहुमिंजिला इमारत अंतहीन

ईट पत्थरों से पटी जमीन
बहुमिंजिला इमारत अंतहीन 
हरियाली जाने कहा विलीन
विकास के नाम तल्लीन
खोये खेत खलियान रंगीन
शोर शराबे में हुए लींन 
परम्पराये हुई बोनी
इंसानियत हुई घिनौनी
धर्म ईमान का कीमत तय
जुर्म से अब किसको भय
बदली गयी जीवन की लय
भ्रष्टाचार में हुयीं श्रिष्टा विलय
पता नही यह कैसा नवनिर्माण
जहा भेद गए विकृति के बाण
आज नहीं ख़ुद पर यकीन
रुलाती किलसाती खबरें ताजो तरीन
गैरियत अकेलापन जीवन उदासीन
ईट पत्थरों से पटी जमीन
बहुमिंजिला इमारत अंतहीन

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