Monday, March 12, 2012

सुख चैन जीवन का


प्रिय तेरे साथ ही चला गया
सारा सुख चैन जीवन का
मेरे मन के कोरे कागज पर
लिखा फसाना मेरे दिलबर का
तेरी हँसी खनकती सी
साज़ बनी मेरे जीवन का
तेरे पायल कि खनखन से
था पागल मन मेरा बहका
पहले थी यह रातें छोटी
अब ऐहसास मुझे पल पल का
आते जाते तुझको ढूँढू
हाल ना पूछो मेरे मन का
हर रोज़ तुम आती सपनो में
दर्द जगाती टुटे स्वप्न का
मेरी यादें न तुझसे दूर
मै कल्पित हूँ इस बंधन का
बिखरे सपने बिखर गया मै
मन आस रहा आलिंगन का
मेरे हाथ न हाथ तेरा
अहोभाग्य है तेरे कंघन का
जो ख़ुद से तूने अपनाया
तरस नहीं मेरे पागलपन का
दर्पण को भी अभिमान प्रिय
जो द्र्श्यमान तेरे सुंदर यौवन का
प्रिय मेरी रूह में बसती तुम
पर छुए तुझे, झोका मंदपवन का
प्रिय तेरे साथ ही चला गया
सारा सुख चैन जीवन का
मेरे मन के कोरे कागज पर
लिखा फसाना मेरे दिलबर का

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