Thursday, February 9, 2012

तूफान अभी बाकी है!


किसी ने कहा की....
तिहाड़ खुले रखाना तू अपने दरवाजे रात दिन,
कुर्सियों पर अब तलक कई बेईमान अभी बाकी है! 
तो मेरा जबाब है.......
आज उन बेइमानो को आगाह कर दो,
सुधार जाए क्योकी मतदान अभी बाकी है!
मुफलसी के सैलाब में बह जायेंगे,
जनता के आक्रोश में तूफान अभी बाकी है!
हिंदू मुस्लिम के नाम पर न भड़काओ,
अमन और शांति पसंद इनसान अभी बाकी है!
बुजुर्गों की नसीहत और बच्चो की दुआये,
युवा शक्ति से भरा नौजवान अभी बाकी है!
सियासत न कर कोशिस जर्जर मेरी इमरात,
मज़बूत इरादों भरी बुनियाद का मकान अभी बाकी है!
तेरी हर चाल पर जो शैय और मात दे सके,
वतन कि जमी पे वह ठाकुर और पठान अभी बाकी है!
रजिया और लक्ष्मीबाई की रणभुमि यही,
उसी नारी शक्ति से भरी खान अभी बाकी है!
ये चुप्पी में ना समझ बुझदिलो की तारीफ,
जो मुँह तोड़ जबाब दे सके वह जान अभी बाकी है!
जिंदगी मौत से कहीं बदतर ना हो जाए तेरी,
बुंदेलो और वीर मराठों की संतान अभी बाकी है!

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