Sunday, January 22, 2012

विचार


विचार कब कहा कैसे आते है!
यह तो मुझको पता नहीं!
पर मन में हलचल दे जाते है!
जिसकी कोई इंतिहा नहीं!
कुछ के जबाब मिल पाते है! 
पर कुछ की सूरत पता नही!
जिज्ञासा में कब हम थक जाते है!
मन भीतर निश्चित व्यथा नहीं!
कुछ विचार प्रफुल्लित कर जाते है!
सदैव मन मंथन की प्रथा नहीं! 
खट्टे मीठे अनुभव अपनी बुनियादे है!
जो परिणामो से लापता नहीं! 
झंझावर विचारों का सब कहा सफल हो पाते है!
पुना प्रयत्न करना है मुझको,
असफलता कोई खता नही!
विचार कब कहा कैसे आते है!
यह तो मुझको पता नहीं!

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