Sunday, January 22, 2012

संसद भी शर्मिंदा बेहद


क्या हुआ क्यू आज हम याद आए!
विगत पाँच वर्ष तो आप नजर न आए!
पहले भी थे आपके बुलंद इरादे!
किए थे पहले भी आपने कई वादे!
सत्ता क्या मिलीं सब भूल गए!
पिछले चुनावी वादे तो फिजूल भये!
फिर वही पुरानी प्रक्रिया दोहराने!
आए है आप क्यू हम्हारे मुहाने!
बतलाये तो सही इस बेशर्मी कि कोई हद है
आपकी गुस्ताखी से संसद भी शर्मिंदा बेहद है!
आप फिरका परस्त जो कभी बाज़ ना आए! 
अपनी नाजायज करनी पर तुम्हें शर्म न आए! 
जो ईमान धर्म को ताख रख लूट मचाये!
हल नहीं मिलता कैसे तुमसे देश बचाये!
बाहरी शत्रु का पता आपके घर से होकर जाए!
फिराक में आप की कैसे देश को बेचा जाए!
मुश्किल यह जान कर भी हम कुछ ना कर पाये!
बस बेबस हो पुछते...........?
क्या हुआ क्यू आज हम याद आए!

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