Friday, November 4, 2011

खुशिया !


खुशियो कि दिशा में कदम और कदमों को चुमती खुशिया !
दोनों के फासले क़रीब पर मिटती नहीं क्यू यह दुरिया !
अपने छोटे से दिल के कोने में बसी अनगिनत तमन्नाये !
दिल खुशियों से होता पागल जो एक भी मंज़िल  पाये !
हम सबकी खुशियों कि परिभाषा रिश्तों कि डोर से है !
अनुभुतिया समान कोई इस ओर से है कोई उस छोर से है !
अपने से कही ज्यादा जो जुड़ी दिल के क़रीब चितचोर से है !
नन्हे लाल कि किलकारियो में माँ कि खुशियों कि थाह नही !
साँझ ढले जब घर लौटे तो हर इंसा का सच्चा हर्ष प्रवाह वही !
पत्नी खुश जब पति के बागवाँ में सुकून कि बयार बहे !
अध्यापक हर्शित जब शिष्य जीवन के पथ में सफल रहे !
मातृभूमि् प्रसन्न जब हममें सर्वसुख सदभावना बनी रहे !
बहन भाई तो एक दुजे की कुशलछेम से अतिप्रसन्न रहे !
मित्रों कि खुशी मात्र मित्र के संग साथ से है !
प्रेमी की खुशी प्रेयसी के जीवनपर्यंत साथ से है !
पड़ोसी की खुशी हसती खेलती मुलाकात से है !
हर रिश्तो में खुशी प्रेमपूर्वक मेलमिलाप में है !
यानी खुशिया अपनी अपनों से ही है जिनसे आज दूर हुए !
चलो मिटाए भेद हम मन के चलो खुशियों को फिर से छुए !
खुशियो कि दिशा में कदम और कदमों को चुमती खुशिया !
दोनों के फासले क़रीब पर और मिट जायेंगी यह दुरिया !

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