Tuesday, September 6, 2011


कहां कितने खाली पद


प्राथमिक शिक्षक
6,89,256
पुलिसकर्मी
5,30,580
नर्सें (विश्व स्वास्थ्य के मानक के अनुसार)
24,00,000
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन
1,48,361
सेनाओं के अधिकारी
11,137
खुफिया ब्यूरो
9,443
केंद्रीय विद्यालय
6,374
मेडिकल कॉलेज
6,340
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान
1,693
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान
1,522













बेरोजगारी से लोग त्राहिमान है नेताओं कि चल अचल संपत्ति का ब्यौरा करोड़ों में है, सरकारी कर्मचारियों की 



जवाबदेही के नाम पर नियुक्तिया अधुरी है यानी देश कि बिगड़ती अर्धव्यवथा शीशे कि तरह साफ़ जगजाहिर 


है और ऐसे में सरकार के खिलाफ यदि कोई टिप्पड़ी कर तो विशेषाधिकार के तहत मुकदमे में फँसने के लिए 


तैयार हो जाए, सौ कि सीधी बात यह संसद, मंत्री, नेता, एम एल ए बे लगाम घोड़े है और इनका एक मात्र 


उद्देश्य केवल अपना स्वार्थ!


यह नियुक्तिया अधूरी क्यों है इसका जबाब कौन देगा और इन अधूरी नियुक्तियों के परिणामस्वरूप विभागों 


कि विफलता का भुगतान आख़िर जनता क्यों और कब तक भुगते, यह निकम्मी सरकार क्या मौन रह कर 


अपना पल्ला झाड़ लेगी या जनता के सामने अपनी जबाबदेही का दायित्व निभायेगी?

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