Thursday, August 4, 2011

अपील

संसद की दुहाई देने वाले नेताओं से अपने ब्लॉग के माध्यम से पूछना चाहता हूँ कि मान्यवरो आपकी संसदीय बहस से आम जनता का क्या लेना देना जब आप महंगाइ पर कोई रोक ही नही लगा सकते! वर्ष में चौथी बार दूध का दाम बड़ जाना, पेट्रोलियम आम आदमी कि पहुँच से बाहर हो जाना, साँग सब्ब्जियो में सौ प्रतिशत का हिजाफा हो जाना, एक अदद घर का सपना मात्रा सपना बन कर रह जाना, अपने बच्चों कि शिक्षा के लिए अपने निवाले से समझौता करना पड़ता है शौक आउर इच्छाओं को पूरा करना तो बहुत दूर की बात है, बेरोजगारी की समस्या से जुझ कर आज लोग खुद्खुशी करने पर आमादा हो ग्ये है ऐसे में आप कि संसदीय बहस का आम आदमी क्या अचार डालेगा! ग्लोबल परिस्थियो का हवाला दे कर जनता का फुद्दु काटने वाले आपके बयान से आम जनता का दम घुटता है, कब तक इसी तरह कि फिजूल बकवासबाज़ी से अपना पल्ला झाड़ते रहेंगे, यह आप सभी जानते है कि आज जनता भलीभाँति जानती है कि इस बेलगाम हालत के सिर्फ़ आप ही जिम्मेदार है क्योकि आप अपने घर को भरने के चक्कर में वर्षो से चोरबजारी करते रहे है जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है, समय समय पर आप लोगो कि करतूतें जग जाहिर होती रही है, आपके कितने  ही साथियों पर भ्रष्टाचार के मुकदमे भी चल रहे है, हालाँकि आप जैसे शातिर लोग इन मुकदमों से भी बरी हो जाते है या फिर कुछ समय बाद फिर बेशर्मो कि तरह दुसरे भ्रष्टाचार में लग जाते है, खैर इन बातों में क्या रखा है क्योकि आप जैसे दबंग लोगो का आम जनता कुछ बिगाड़ भी नहीं सकती है इस लिए एक आम आदमी कि अपील समझ कर विचार करे की भ्रष्टाचार कि भी एक सीमा होनी चाहिए, आम आदमी आज कंगाली के हाल से बेहाल हो कर अपना दम ना तोड़ दे, दूसरों का निवाला छीन  कर कब तक आप चैन से जी पाएँगे, कृपया यह राछसी परवत्ति छोड़ दे, आप लोग राजनीति में सेवा भाव तो ला नहीं सकते पर अगर थोड़ी भी इंसानियत है तो रहम करे! "नीरज कि पाती" 

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