Wednesday, August 10, 2011

बेमायने पंद्र्ह अगस्त हुआ !


सपने देखना उन्हें सजाना लगे आज सपना सा क्यू !
हर बात में है एक राज छुपा और हर राज कि बेकदरी क्यू!
जन्म के साथ हँसी बच्चे कि दब के सिसकियो में बदली क्यू!
आज़ाद हिंद के वासी है पर आवाज़ दबी रहती है क्यू!
बेमायने पंद्र्ह अगस्त हुआ तो कोई बताए खुशी हो भी क्यू!
महँगाई मुँह बाये खड़ी दो वक्त की रोटी अंधियारे में!
उनके घर तो भरे हुए जो सत्ता के गलियारे में!
गरीब कि औलादे भूख के कारण पहुँची मौत के किनारे पे!
हर गली मुहाने माल बने पर आधी दुनिया सड़कों पे!
लक्मे फैशन वीक मने पर हर गरीब घूमें बिन कपड़े के!
भारत कि कैसी तसवीर बनी बदरंग हुई यह तसवीर  क्यू!
देख के जिसको खून के आँसू बह्ते आज  सभी के क्यू!
सपने देखना उन्हें सजाना लगे आज सपना सा क्यू !
हर बात में है एक राज छुपा और हर राज कि बेकदरी क्यू!
विदेशी व्यापार बड़ावा सही पर स्वदेशी कि बदहाली क्यू!
कमानवेल्थ गेम सही पर बाल श्रमिक बना किसी का बचपन छीना क्यू!
विकास मद में फंड जरूरी पर सेंध मार घुसखोरी क्यू!
क्यू वादे मात्र चुनावी है और पाँच साल हरामखोरी क्यू!
प्रजातंत्र जब देश हम्हारा फिर हर आवाज़ दबाई क्यू!
जब भी जनता ने आवाज़ उठाई तो लाठीचार्ज कराया क्यू!
बेमायने पंद्र्ह अगस्त हुआ तो कोई बताए खुशी हो भी क्यू!
आज़ाद हिंद के वासी है पर आवाज़ दबी रहती है क्यू!

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