Saturday, July 30, 2011

नेताओं कि बौखलाहट

नेताओं कि बौखलाहट आज छुपी नही है जब जनता सक्रिय रुप से अण्णा हजारे एवं बाबा राम देव के आंदोलन के साथ जुड़ें रही है और उनकी कथनी एवं करनी का हिसाब खुले आम लोग माँग रहे है,साथ ही उनके उंपर निगरानी रखने के लिए लोकपाल बिल कि पैरवीं कर रही है!  तब लालु, कपिल सिब्बल और दिग्विजय जैसे शीर्ष के नेता अपनी बौखलाहट कि वजह से अनाप शनाप वक्तव्य देते नजर आ जाते है कि अण्णा का काम समाज सेवाज है तो वोह समाज सेवा करे, और बाबा योग गुरु है वोह योगा ही करे, राजनीति में टाँग ना अड़ाये, अरे भाई मै पूछता ही राजनीति किसी कि बपौती तो नही है जो किसी से परमिट लेकर कि जाए, हा अगर कोई अपने नाम का राजनीति में पट्टा लिखा के आया है तो कृपया बाकी को भी बताए, दूसरी बात जब देश के नेताओं ने बेह्याइ कि सारी हद ही पार कर दी हो तो आम जनता क्यू हस्त्छेप नही करेगी! आज के नेता बाहुबली, उध्योगपति, भ्रष्टाचार में लिप्त है, ऐसे में जनता का विद्रोह करना स्वाभाविक है, जाने कितना धन कमाने कि लालसा है कि रोज़ नए घोटाले करते है, उस पर लोगो से उम्मीद रखे कि कोई उनकी खिलाफत ना करे,कुछ नेताओं का मानना है कि देश के मसले संसद में हाल होते है, पर शायद उन्हें यह भी नही मालूम कि देश कि संसद कि धज्जिया इन्हीं लोगो ने आए दिन उड़ाई है, मीडिया के माँध्यम से संसद में आए दिन यह जो जुत बाज़ारी करते है वह आज जनता समाचार के माध्यम से समय समय पर टी. वी. पर देखती है कि यह नेता हमाम में कितने नंगे है! फिर भी ऐसी करतूत करने वाले नेता ना जाने कैसे बेशर्मो की तरह बयानबाजी कर लेते है!
                                                                                                                                                 "नीरज की पाती"

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