Saturday, July 30, 2011

दीमक

देश आज़ाद है यह केवल कहने के लिए है वरना 1947 कए बाद हम दोबारा 
partantra हुऐ थे और इस बार बेड़ा गर्क हो मेरे नामाकूल राज नेताओं का
 इन लोगो ने देश का हाल ही बेहाल कर दिया. यह वह दीमक है जो देश को
 भीतर ही भीतर खोखला कर रही है, आज जरूरत है कि इन्हे मारने के
 लिए फिनअयाल का और जरूरत पढे तो तेज़ाब का पोछा लगाये.

नेताओं कि बौखलाहट

नेताओं कि बौखलाहट आज छुपी नही है जब जनता सक्रिय रुप से अण्णा हजारे एवं बाबा राम देव के आंदोलन के साथ जुड़ें रही है और उनकी कथनी एवं करनी का हिसाब खुले आम लोग माँग रहे है,साथ ही उनके उंपर निगरानी रखने के लिए लोकपाल बिल कि पैरवीं कर रही है!  तब लालु, कपिल सिब्बल और दिग्विजय जैसे शीर्ष के नेता अपनी बौखलाहट कि वजह से अनाप शनाप वक्तव्य देते नजर आ जाते है कि अण्णा का काम समाज सेवाज है तो वोह समाज सेवा करे, और बाबा योग गुरु है वोह योगा ही करे, राजनीति में टाँग ना अड़ाये, अरे भाई मै पूछता ही राजनीति किसी कि बपौती तो नही है जो किसी से परमिट लेकर कि जाए, हा अगर कोई अपने नाम का राजनीति में पट्टा लिखा के आया है तो कृपया बाकी को भी बताए, दूसरी बात जब देश के नेताओं ने बेह्याइ कि सारी हद ही पार कर दी हो तो आम जनता क्यू हस्त्छेप नही करेगी! आज के नेता बाहुबली, उध्योगपति, भ्रष्टाचार में लिप्त है, ऐसे में जनता का विद्रोह करना स्वाभाविक है, जाने कितना धन कमाने कि लालसा है कि रोज़ नए घोटाले करते है, उस पर लोगो से उम्मीद रखे कि कोई उनकी खिलाफत ना करे,कुछ नेताओं का मानना है कि देश के मसले संसद में हाल होते है, पर शायद उन्हें यह भी नही मालूम कि देश कि संसद कि धज्जिया इन्हीं लोगो ने आए दिन उड़ाई है, मीडिया के माँध्यम से संसद में आए दिन यह जो जुत बाज़ारी करते है वह आज जनता समाचार के माध्यम से समय समय पर टी. वी. पर देखती है कि यह नेता हमाम में कितने नंगे है! फिर भी ऐसी करतूत करने वाले नेता ना जाने कैसे बेशर्मो की तरह बयानबाजी कर लेते है!
                                                                                                                                                 "नीरज की पाती"

Friday, July 29, 2011

धर्म कि परिभाषा

धर्म कि परिभाषा नफरत तो नही,
 फिर क्यू मंदिरों में खून कि नदिया है बही! 
इबादत का मतलब हैवानियत तो नही,
 फिर क्यू मस्जिदों जिंदगिया मैफुज न रही!
 क्यू मौत का साया जर्रे जर्रे पर बसा,
 क्यू हवाओं को जहेर ने इस कदर है डसा!
 नजर यह किसकी वतन पर लगी,
 किसने कि यह अजब सी ठगी!
 पूछें यह दिल बेचैन मेरा,
 क्यू रात के अंधेरे खोया सबेरा!
 तुमको अगर कुछ मालूम हो भाई,
 बता दो यह आग है किसने लगाई! 

धर्म कि परिभाषा नफरत तो नही,
 फिर क्यू मंदिरों में खून कि नदिया है बही! 
इबादत का मतलब हैवानियत तो नही,

 फिर क्यू मस्जिदों जिंदगिया मैफुज न रही!


"नीरज की पाती"

"चेतावनी"

खुशी होती अगर तुम सच्चे होते, 
माफ कर देते अगर तुम बच्चे होते,
 तुम ने तो जान कर कत्ल का रास्ता है चुना,
 तुम्हरा घर ही लोगो कि लाशों पर बना,
 तुम खून के प्यासे रहे हो सदा,
 हैवानियत पे हो तुम ऐसे फिदा,
 ईमान का सौदा किया था कभी,
 अब मातृभूमि को भी बक्शा नही, 
सब कुछ पाने कि हसरत में जालिम,
 तुमने लड़ाया राम रहीम,
 मिटाने का तुमको अब समय आ गया, 
तभी कभी अन्ना कभी राम देव छा गया,
 सुधार जाओ वरना कुचल देगी यह जनता,
 क्योकि हर कृत्य कि होती है एक इंतहा.

खुशी होती अगर तुम सच्चे होते, 
माफ कर देते अगर तुम बच्चे होते,



 "नीरज की पाती" 

लालू का जहर


आज कि ख़बर लालू फिर बौखलाया है,
अन्ना और बाबा पर जम के चिल्लाया है!
कहता हर बात का हल संसद है,
हल करने वाले हम विधायक एम पी सांसद है!
यु सड़कों पर धरना आंदोलन कर, 
क्यू अन्ना और बाबा करे प्रदर्शन!
लालु कहता अन्ना और बाबा अपना अपना काम करे,
सब ठीक करेंगे हम नेता थोड़ा तो धीरज धरे!
अरे 64 साल बीते इस आजादी को,
इतने ही वर्ष इंतज़ार करे झेले इस बरबादी को!
कर दूँगा हर पीड़ा शांत!
मै लालु यह वादा करता कि 128 वर्ष उपरांत,
तब तक ना अन्ना रहेंगे ना बाबा रहेंगे, 
वर्तमान के नेता भी तब तक नरक लोक सिधारेन्गे!
इस लिए मत करो कोई वयवधान!
हम सांसद ही दे सकते है तुमको ऐसा समाधान,
बस थोड़ा सा इंतज़ार करे,
सब ठीक करेंगे हम नेता थोड़ा तो धीरज धरे!

"नीरज कि पाति"
                                 

जीवन एक संघर्ष है

जीवन एक संघर्ष है, 
स्वीकारो और प्रतिकार करो,
अंतर्मन एक रणभूमि है,
स्वीकारो और हुंकार भरो! 
देख के अनदेखा करना सबसे घृणित अपराध है यह,
कैसा भी शोषण सहना बड़े शर्म की बात है!
हिंसा और अहिंसा क्या है भाई, दोनों ही अर्थविहीन है!
भेद रहित अभिव्यक्ति में सच्चाई विलीन है!
भइया सच्चे का है बोलबाला, 
तो सच्चो का प्रचार करो!
कोई आएगा बदलेगा तक़दीर,
मत इसका इंतज़ार करो!
भीतर मन जो ज्योति है 
उसमें ही अंगा भरो!
जीवन एक संघर्ष है, 
स्वीकारो और प्रतिकार करो, 
अंतर्मन एक रणभूमि है,
स्वीकारो और हुंकार भरो!


 "नीरज कि पाती"

शपथ


राष्ट्र के निर्माताओं ने कब सोचा था एक दिन ऐसा भी आएगा!
अपनी ही धरती पर कोई अपनो का ही खून बहायेगा !
जात धर्म के चक्कर में फँस कर भाई, भाई से लड़ जायेगा!
चंद धन दौलत के वास्ते,यह राजतंत्र तक बिक जायेगा!
यह देश है वीर जवानो का,अलबेलो का मस्तानो का!
सुना कभी यह गीत था हमने,अब मोल नही इन गानों का!
निडर जवान कहा गये,क्यू विरोध का स्वर बुलंद नही!
क्यू खून खोलता नही किसी का,क्यू हालत पर दवंद नही!
बहुत हुआ, अब चुप्पी तो तोड़ो, फिर से अलख जगानी है!
तुम कर सकते हो नव निर्माण,जरूरत आज जवानी है!
जोश दिखा दो गर्म लहू का,दुश्मन ना सम्झे पानी है!
15 अगस्थ 26 जनवरी नही दर्शाते आजादी है,
मन से अगर प्रतंत्र रहे तो हर तिथि बे-बुनियादी है!
राष्ट्र के निर्माताओं ने कब सोचा था एक दिन ऐसा भी आएगा!
अपनी ही धरती पर कोई अपनो का ही खून बहायेगा !
शपथ लो दिन् ऐसा भी आएगा,
मुजरिम चाहे कैसा भी हो अपनी मुँह की खायेगा!!
           
                                  "नीरज कि पाती"

साथी कुछ ना कुछ तो कहना होगा!


ज्यादा की दरकार नही पर ....
साथी कुछ ना कुछ तो कहना होगा!
एक अकेला थक जयेगा...
साथी तुझको भी संग चलना होगा!
हवा चली बदलाव की...
साथी तुझको भी संग बहाना होगा!
माना कठिन यह अग्निपथ है....
लथपथ हो कर भी सहना होगा!
बड़ चली अब क्रांति कि रैली...
साथी अंत तलक संग रहना होगा!
वर्तमान का जंगलराज....
साथी मर मिट के ही मिट पायेगा!
संघर्षों को संकल्प बना....
साथी तभी घोर अंधेरा मिट पयेगा!
नाव निर्माण हाथ में तेरे.....
साथी आगे बड़ तू भारत माँ का गहना होगा!
ज्यादा की दरकार नही पर ....
साथी कुछ ना कुछ तो कहना होगा!
एक अकेला थक जयेगा...
साथी तुझको भी संग चलना होगा! 

"नीरज कि पाति"
                    

" सच्चे आज़ाद हिन्दुस्तनी " और " हम आज भी ग़ुलाम"

वर्तमान सरकार का हर कदम बहुत सराहानीया क्योकि वह सच्चे आज़ाद हिन्दुस्तनी है!
आजादी का मतलब सकता शब्द जहा लगा हो वह सब कर सकते है...
विकल्प= अन्नयाय कर सकते है,
पीड़ा दे सकते है, 
लूट कर अपना घर भर सकते है,
हिंसा का जबाब अहिंसा से दे सकते है,
झूठे केस में असली मुद्दे दबा सकते है, 
सौ की सीधी बात हर वोह मनमानी जिसमे जनता की आवाज़ दब के रह जाए वह हर कु-कृत्य कर सकते है.
दोष उनका नही अरे भाइ वह सच्चे आज़ाद हिन्दुस्तनी है और हम आज भी ग़ुलाम अँगरेजों के नहीं बल्कि अपनी ही चुनी सरकार के!
जागो भारत जागो!!
                                                                           "नीरज की पाति""

"मुद्दे बहुत है"



मुद्दे बहुत है शब्द कम पड़ जाते है!
अपने ही घर में क्यू हम चुप रह जाते है!
खुले घूमते चोर लुटेरे क्यू हम लुटे पीटे रह जाते है!
क्यू विद्रोह बुलंद नही, क्यू स्वर दबे रह जाते है!
बहता खून शिराओ का, क्यू पानी सा लगता है!
जुर्म के आगे, क्यू मानुस सहमाँ सहमाँ दिखता है!
अपने वतन कि माटी पर, क्यू विदेशी दबदबा दिखता है!
बदलों यह तसवीर वरना एक दिन पछ्ताओगे!
देश को जकड़ेगी बेड़ी, यू हाथ मसल रह जाओगे!
उठी क्रांति देश में,मुश्किल से ऐसे अवसर आते है!
चलो चुन चुन कर एक एक मुद्दों पर आते है!
मुद्दे बहुत है शब्द कम पड़ जाते है!
अपने ही घर में क्यू हम चुप रह जाते है!
"नीरज कि पाति"

"आत्मदाह"


"आत्मदाह"

एक गरीब बड़ी लालच भरी निगांहो से ताकता है!
अमीरो के कुत्तों के बर्तन को झाकता है!
पूछता है ख़ुदा से इनसान क्यू बनाया!
कुत्ते को दूध ब्रेड विदेशी खाना खिलाया!
क्यू न किसी ने हम पर रहम खाया!
कुत्तों को तो महंगी गाड़ियों में घुमाया!
बच्चे बिलख्ते सड़कों पर हमारे,
क्यू ना किसी ने दिल से लगाया!
अपनी दुःख भरी त्रासदी से होकर बेहाल,
पूछता है ख़ुदा से इनसान क्यू बनाया!
वह अपने इस हालत को जानवर से भी गिरा आंकता है!
फिर आत्मदाह कर मौत की तरफ़ भागता है!
एक गरीब बड़ी लालच भरी निगांहो से ताकता है!
अमीरो के कुत्तों के बर्तन को झाकता है!
"नीरज कि पाति"

"दहेज दानव"


"दहेज दानव"



बेटी हुई जवान पिता को डर सताता है!
क्योकि आते जाते कोई भी उसको छेड़ जाता है
करने हाथ पीले है पर जेब में थोड़ी मंदी है!
दहेज दानव जकड़ रहा, यह परंपराएँ अंधी है!
यह एक पिता कि नही, हर दुजे घर कि कहानी है!
सोचो और जबाब दो, कब तक यह कुरीति दोहरनी!
तुम बद्लोगे जग बदलेगा, कोई तो शुरुवात करो!
बेटा बेटी एक समान, दोनों में अन्तर न करो!
दहेज हत्या पाप है, मानवता पर अभिशाप है!
आओ और आवाज़ दो कि हम सब इसके खिलाफ है!
अंतर्मन हो मज़बूत अगर तो अमिट भी मिट जाता है!
बेटी हुई जवान पिता को डर सताता है!

क्योकि आते जाते कोई भी उसको छेड़ जाता है
बेटे को ब्याह कर सोचो बेटी भी ब्याहानी है!
आज नही कल सोच तेरी भी वही कहानी है!
फिर काहे का भेद भाव छोड़ो कुरीति पुरानी है!
नए दौर में लिख दो मिल कर फिर से नई कहानी है!



"नीरज कि पाति"